Thursday, 8 October 2026

पहला फ्लॉप, सेट पर मिला ‘हीरोइन बदल दो’ का जख्म... फिर ‘बाहुबली’ से बनीं पैन-इंडिया स्टार: 13 साल की उम्र में शुरू हुआ तमन्ना भाटिया का सफर

 


सिनेमा की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, उसके पीछे का सफर उतना ही कांटों भरा होता है। एक स्कूल गर्ल, जिसने महज 13-14 साल की उम्र में फिल्मों की दुनिया में कदम रखा, आज भारतीय सिनेमा की सबसे सफल और लंबे समय तक टिकने वाली अभिनेत्रियों में शुमार है। यह कहानी है तमन्ना भाटिया की, जिन्होंने शुरुआती झटकों, रिजेक्शन और सेट पर हुए अपमान को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया।

13 साल की उम्र में साइन की पहली फिल्म

21 दिसंबर 1989 को मुंबई में जन्मी तमन्ना के पिता संतोष भाटिया एक डायमंड मर्चेंट हैं। तमन्ना नेशोभा कपूर के पृथ्वी थिएटर से जुड़कर बचपन से ही स्टेज परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। मात्र 13.5 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘चांद सा रोशन चेहरा’ साइन की। जब फिल्म का प्रमोशन चल रहा था, तब वह सिर्फ 15 साल की थीं और दसवीं बोर्ड की तैयारी कर रही थीं। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई, जिसके बाद उनके लिए बॉलीवुड में टिकना मुश्किल हो गया।

जब सेट पर कहा गया- ‘हीरोइन बदल दो’

करियर के शुरुआती दौर में तमन्ना को साउथ सिनेमा का रुख करना पड़ा। भाषा और संस्कृति दोनों बिल्कुल नई थीं। इसी दौरान उनके साथ एक ऐसी घटना घटी, जो किसी भी नए कलाकार का हौसला तोड़ सकती थी।

तमन्ना ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि साउथ के एक बड़े स्टार के साथ शूटिंग के दौरान वह एक सीन को लेकर सहज नहीं थीं। उन्होंने जब इसे करने से मना किया, तो सेट पर सरेआम डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने कह दिया— ‘हीरोइन बदल दो।’

एक कम उम्र की नई अभिनेत्री के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। लेकिन तमन्ना ने दबाव में झुकने के बजाय शालीनता से अपनी बात पर कायम रहना बेहतर समझा। उन्होंने साबित कर दिया कि अपनी बात मनवाने के लिए चिल्लाना जरूरी नहीं, शांति में भी बड़ी ताकत होती है।

असफलता को पीछे छोड़ ‘बाहुबली’ तक का सफर

तमन्ना ने साल 2005 में तेलुगु फिल्म ‘श्री’ और 2006 में तमिल फिल्म ‘केडी’ से साउथ में अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद ‘हैप्पी डेज’ और ‘कल्लूरी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।

भले ही उनके करियर में ‘हिम्मतवाला’, ‘हमशकल्स’ और ‘आगाडु’ जैसी फिल्में उम्मीद पर खरी नहीं उतरीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। साल 2015 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ ने उनके करियर को ऐसा आयाम दिया कि वह रातों-रात पैन-इंडिया स्टार बन गईं।

आज खुद को सबसे ज्यादा फ्री महसूस करती हूं

दो दशक से ज्यादा लंबे करियर के बाद भी तमन्ना का जोश कम नहीं हुआ है। उनका मानना है कि सफलता किसी एक अवॉर्ड या ब्लॉकबस्टर से नहीं मापी जाती, बल्कि लगातार काम करने और नए किरदार निभाने से तय होती है।

हाल ही में उनकी फिल्म ‘ओन - फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ रिलीज हुई है, जिसे लेकर दर्शकों में गजब का क्रेज देखा जा रहा है। 20 साल से ज्यादा वक्त बिताने के बाद भी तमन्ना मानती हैं कि उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अभी उन्हें कई मील के पत्थर तय करने बाकी हैं।


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